Wednesday, June 23, 2010

आओ , थोड़ा हँस तो लें.... 5


* सिटी बसके एक कंडक्टर ने एक बाबूजी से पूछा-जनाब, कल रात आप सही सलामत घर पहुंच गए थे न?
बाबूजी-क्यों? क्या तुम समझते हो कि मैंने बहुत ज्यादा शराब पी रखी थी, अरे भोले आदमी, तुम ने देखा नहीं कि मैंने नशे की हालत में भी अपनी सीट उस वृद्धा स्त्री को दे दी और खुद खड़े-खड़े सफर किया।
वही तो मैं कह रहा हूं। कंडक्टर बोला-उस समय बस में केवल आप और वह वृद्धा स्त्री ही तो सवार थे।

* दो शहरी दोस्त आपस में बातें कर रहे थे। एक देहाती उनके दरम्यान आकर चलने लगा। उनमें से एक शहरी ने मजाक में उससे कहा-क्यों भई, तुम बेवकूफ हो या गधे?
देहाती बोला-जी, दोनों के बीच में हंू।

* पति-यह शीशा तुम्हारे कारण टूटा है। पत्नी-जी नहीं, तुम्हारे कारण टूटा है। यदि तुम शीशे के आगे से नहीं हटते तो यह जूता शीशे की बजाय आपको ही लगता।

* सरोज ने अपनी सहेली शबनम की बहादुरी की प्रशंसा करते हुए कहा-तुमने सचमुच बहुत बहादुरी दिखाई और चोर पर इस तरह टूट पड़ी कि वह भाग खड़ा हुआ।
शबनम-मुझे क्या पता था कि वह चोर था। मैँ तो समझी थीं कि मेरा पति शराब पीकर गिरता पड़ता फिर देर रात गए घर आया है।

* एक ग्रामीण एक शहर में गया। वहां उसे कुछ दिन रहना था इसलिए उसने होटल में एक कमरा ले लिया। कुछ देर बाद उसने मैनेजर से पूछा-यहां खाने का क्या समय है? मैनेजर ने कहा-नाश्ता सुबह सात बजे से ग्यारह बजे तक। दोपहर का खाना बारह बजे से तीन बजे तक और रात का खाना छह बजे से रात दस बजे तक।
अगर इतना समय खाने में ही लग जाएगा तो मैं शहर कब देखूंगा? ग्रामीण ने भोलेपन से पूछा।

* मीता- मेरे पिताजी ने तो तैरने का रिकार्ड तोड़ दिया। पूरे तीन दिन बाद लौटे हैं।
गीता-वह तो ठीक है। लेकिन तुम्हारे पिताजी हमारे पिताजी का मुकाबला नहीं कर सकते।
कैसे?
मेरे पिताजी चार साल पहले तैरने गए थे और आज तक नहीं लौटे हैं।

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